Does the Indian Education System Include Financial Education?

 

Photo by Pixabay

भारत विश्व के सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में से है। यहाँ की ज्यादातर आबादी खेती पर निर्भर है, और मै मनाता हूँ की आने वाले कुछ वर्षों में खेती पर निर्भरता का अनुपात काफी हद तक कम हो जायेगा। यह तथ्य मेरे द्वारा गढ़ा नहीं गया है अपितु इतिहास इसकी तरफ संकेत करता है। खैर इस मुद्दे पर बात करना मेरा उदेश्य नहीं है। मुझे इस बात पर अफ़सोस होता है की इतनी बड़ी आबादी का ज्यादातर हिस्सा शिक्षा के विकसित स्तर से कोसों दूर दिखाई पड़ता है, और वो भी तब, जब आज़ाद हुए भारत को 75 से ज्यादा साल हो गए है।

शिक्षा आज भी एक बड़े हिस्से की पहुँच के बाहर है। अच्छी और सर्वांगीण शिक्षा एक तबके के लिए सिर्फ एक सपना है जिसको वो अपनी ज़िन्दगी में शायद ही पूरा कर पाएं। इसलिए मै यह भलीभांति समझ सकता हूँ की भारत जैसे विशाल देश में एक बहुत बड़ी आबादी के लिए “Financial Education” उनकी पूरी ज़िन्दगी में एक ऐसा रहस्य है जिसकी खोज उनके लिए असंभव ही रहेगी। 

Financial Education का ज्ञान सीधे तौर पर “अर्थ (पैसा)” से जुड़ा है जिसको समझने के लिए उच्च स्तर का बौद्धिक विकास चाहिए जिसको प्राप्त तभी किया जा सकता है जब पुरे देश में अच्छी और सर्वांगीण शिक्षा मुहैया करवाई जाये।  पर हमारे विद्यालयों में विज्ञान और कला के आलावा किसी दूसरे विषय में शायद ही अच्छी शिक्षा दी जाती है।  वाणिज्य विषय को भी वो निष्पक्ष न्याय नहीं मिलता जिसमे “अर्थ” को उस स्तर पर समझाया जाये की आगे जाकर जीवन को  “अर्थ की स्वतंत्रता (Financial Freedom)” के साथ जीया जा सके। स्कूल और कॉलेजों से निकलने के बाद भी एक व्यक्ति के लिए Financial Education का ज्ञान शून्य ही रहता है। 

उदाहरण के तौर पर आप खुद से ये सवाल पूछ सकते है की “Asset” और “Liability” में क्या अंतर है। मै दावे के साथ कह सकता हूँ की ज्यादातर लोगों को इसका उत्तर नहीं पता होगा जबकि इन दोनों का हमारे दैनिक जीवन में उतना ही महत्व है जितना की रोटी , कपडा और मकान का। फिर ये शून्यता और अज्ञानता क्यों है ? जवाब हमारे देश की शिक्षा प्रणाली में छुपा हुआ है। सर्वांगीण शिक्षा के नाम पर देश में सिर्फ बातें की जाती है, इसका ज़मीनी सच्चाई से कोई लेना देना नहीं है।

जैसा की मैंने ऊपर कहा की Financial Education का सम्बन्ध सीधे तौर पर “अर्थ” से जुड़ा है। अब आप खुद इस बात की गहराई को समझिये की हमारे विद्यालयों और कॉलेजों की शिक्षा आखिर में हमे इसी लायक बनाने का प्रयास करती है की हम एक उम्र के बाद पैसा कमा सके। ये साधारण सी बात है और सच भी है। पर इसी “अर्थ” को हम समझने में विफल हो जाते है  जबकि इसको समझना हमारे लिए कितना ज्यादा जरुरी दिखाई पड़ता है। इसकी विफलता का कारण मै ऊपर स्पष्ट कर चूका हूँ।

Why Do Indians Need Financial Education?
खून पसीने से कमाया हुआ एक रूपया भी अगर सही तरीके से नहीं लगाया जाता तो सोच के देखो आपको कितना दुःख होता है। मै सच बोल रहा हूँ। और इस दुःख की दवा सिर्फ एक ही है की आप Financial Educated हो। पर हमारी देश की ज्यादातर जनता में यह कमी दिखायी देती है। हम काफी बार ऐसी परिस्थितियों का सामना करते है जब हमारे खून पसीने की कमाई व्यर्थ चली जाती है और हमे असहनीय दुःख का सामना करना पड़ता है। 

यहाँ Financial Education उन सभी क्रियाओं से सम्बंधित है जो पैसे से जुडी हुई होती है। चाहे वह बैंक का चेक भरना हो या फिर डिजिटल तरीके से किया गया लेनदेन हो। यह सारी प्रक्रिया हमे स्कूल और कॉलेजों में पढाई नहीं जाती जबकि इस शिक्षा का उपयोग हम उम्रभर करते है।

तकनिकी विकास के बाद से ही मनुष्य की अपेक्षाएं और जरूरतें बढ़ी है। इन सबको पूरा करने के चक्कर में वह अपने पैसो के प्रबंधन सम्बन्धी परेशानियों को रोज़ महसूस करता है। खासतौर से भारतीय समाज में जहाँ परिवार की जरूरते कुछ एक सदस्यों पर ही निर्भर होती है।Financial Education की कमी की वजह से वह जितना भी कमाता है उसे वह कम ही दिखाई देता है। मेरा मानना है की अगर लोग अपनी कमाई को समझदार तरीके से व्यय करेंगे और बचत का तरीका भी सीखेंगे तो आधी समस्या का समाधान उन्हें मिल सकता है। 

खर्च और बचत के बाद भी भारतीय लोगों में एक द्वंद्व बना रहता है।  प्रश्न ये खड़ा होता है की क्या मैंने जितना कमाया है उतना मेरे और मेरे परिवार के लिए काफी है या नहीं ? स्वाभाविक सी बात है ये। पर जब जब आपको ये लगता है तब तब ये मान लीजिये की Financial Education की कमी अभी भी आपके जीवन में है, चाहे आप कितनी भी बचत कर लें।  अभी भी आप अपने “अर्थ” का सदुपयोग करना नहीं सीखे है। 

खर्च , बचत और कमाई के आलावा भी Financial Education में एक फैक्टर बहुत बड़ा रोल अदा करता है जिसको हम कहते है निवेश । जब तक आप निवेश की कला को नहीं समझ पाएंगे तब तक Financial Freedom आपके जीवन में नहीं आ पायेगी। निवेश का मतलब सिर्फ Share Market से नहीं है। निवेश के तौर आप ज़मीं खरीद सकते है , सोना/Mutual Funds खरीद सकते है या फिर किसी बिज़नेस में अपना पैसा डाल सकते है। 

निवेश करने की कला में सबसे बड़ी दिक्क्त ये आती है की निवेश करने के क्षेत्र में पैसा डालने से पहले उस क्षेत्र का अच्छा खासा ज्ञान होना जरुरी है। यह ठीक वैसा ही है जैसे की हम किसी दुकान पर किसी चीज़ को खरीदने से पहले उस चीज़ के बारे में थोड़ी बहुत सही जानकारी रखते है। 

अगर आप निवेश की कला में पारंगत हो जाते है तो एक समय के बाद आपका थोड़ा बहुत निवेश किया हुआ पैसे एक अच्छी रफ़्तार के साथ आपके लिए काम करेगा और उसका मूल्य भी आपकी सोच से ज्यादा बढ़ेगा।  यह मै मज़ाक में नहीं बोल रहा आप इसको अच्छे से जानते है।  उदहारण के तौर पर खरीदी गयी एक ज़मीं का मूल्य कुछ सालो बाद आपके निवेश किये गए पैसे से काफी ज्यादा हो जाता है। 

अब बात यहाँ ये आती है की क्या सभी लोग ज़मीं और सोना खरीद पाते है। नहीं।  निवेश के नाम पर ये सब चीज़े हमारी जेब की तुलना में काफी भारी है।  कुछ गिने चुने लोग ही ऐसा कर पाते है। तो बाकि लोग क्या निवेश नहीं कर सकते ? ऐसा भी नहीं है। शेयर मार्किट से सम्बंधित जितने भी निवेश के क्षेत्र है वो सब एक गरीब से गरीब इंसान के लिए निवेश का रास्ता खोलते है।  जरूरत है तो बस इस क्षेत्र को समझने और पढ़ने की।

Comments

Popular posts from this blog

8 Reasons How Yoga is Better than Gym - Yoga vs Gym

आपणां बडेरा - A Rajathani Poem for Our Rajasthani Ancestors

Top 5 pandemics in history that shook the whole world