क्या पाकिस्तान कोरोनावायरस (COVID-19) से लड़ने के लिए तैयार है?


प्रधान मंत्री, नरेंद्र मोदी, के आह्वान पर पूरा भारत 22 मार्च 2020 की तारीख को एक साथ इकट्ठा हुआ  और साबित किया कि भारत का हर एक नागरिक कोरोनावायरस से लड़ने के लिए तैयार है। इस ऐतिहासिक दिन को "जनता कर्फ्यू" के रूप में जाना गया। पूरे देश ने उन सभी लोगों को सलाम किया जो इस कठिन परिस्थिति में बिना अपनी जान की परवाह किए दिन-रात काम कर रहे हैं। यह पल अपने आप में खास था और सदियों तक याद किया जाएगा।लेकिन हमारा पड़ोसी और कट्टर दुश्मन पाकिस्तान, क्या वह कोरोनावायरस के खतरे का सामना करने के लिए तैयार है? 

यदि हम 22 मार्च 2020 को प्रकाशित द वाशिगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट पढ़ते हैं, तो हम जानेगे कि पाकिस्तान में कोरोनावायरस की स्थिति भयानक होने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार, कोरोनावायरस के संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ रही है। संक्रमित लोगों की दर्ज संख्या 600 सौ से अधिक है और 3 लोग अब तक अपनी जान गंवा चुके हैं।इसके अलावा, अखबार का कहना है कि पाकिस्तान के प्रधान मंत्री, इमरान खान ने अपने सभी नागरिकों से दो सप्ताह के लिए घर पर रहने का अनुरोध किया है। 

अलजज़ीरा की रिपोर्ट माने तो उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने शहरों को बंद नहीं कर सकता और पाकिस्तान ने केवल अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर प्रतिबंध लगाया। गरीबी का बहाना देते हुए पाकिस्तान के प्रधान मंत्री ने कहा कि अगर हम जनता को एक ओर कोरोनावायरस से बचाते हैं, तो दुसरी ओर वे भूख से मर जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को उनकी आर्थिक मदद के लिये आगे आना चाहिए।

पाकिस्तान का सिंध प्रांत कोरोनावायरस से ज्यादा प्रभावित है। 70 प्रतिशत से अधिक संक्रमित लोग वहीं से हैं।ईरान से आए संक्रमित तीर्थयात्रियों को संगरोध शिविरों (quarantine camps) में रखा जाएगा। ये शिविर मुल्तान के पास स्थित हैं। अलजज़ीरा की रिपोर्ट से यह तथ्य भी प्रकाश में आया कि 149 संक्रमित लोग ताफ्तान शिविर में पाए गए, हालांकि पहले उन्हें लक्षणों की अपर्याप्त जांच के कारण छोड़ दिया गया था। आप कल्पना कर सकते हैं कि उन्होंने पकड़े जाने से पहले कितने लोगों ने संक्रमित किया होगा।

जहां कोरोनोवायरस से सुरक्षित होने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता एकमात्र सबसे प्रभावी तरीका है, वहां पाकिस्तान के कई हिस्सों में स्थित ये शिविर गंदे और धूल भरे हैं। इन कोरोनावायरस के शिविरों में, व्यक्तिगत स्वच्छता के बारे में सोचना असंभव है। एक अन्य प्रतिष्ठित अखबार द गार्डियन (The Guardian) से प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार वे कोरोनवायरस को रोकने के लिए सबसे गंदगी वाली जगह हैं। सरकार का उद्देश्य स्वच्छता पर होना चाहिए था लेकिन वहां जाने के बाद, इसके बारे में सोचना असंभव है

बलूचिस्तान प्रांत जो कि ईरान के पास स्थित है और जहाँ पाकिस्तान सरकार इस क्षेत्र में ज्यादा दखल देना पसंद नहीं करती है, कोरोनावायरस की वजह से वहां की स्थिति बदतर है। रिपोर्टों का कहना है कि इस क्षेत्र में, संक्रमित लोगों के इलाज के लिए पर्याप्त अस्पताल और स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं। और जो अस्पताल वहां के हैं, वे कोरोनोवायरस के मामलों को लेने से इनकार कर रहे हैं। अगर हम पाकिस्तान और महामारी के इतिहास पर गौर करें, तो हमें पता चलेगा कि इस देश का उसमें बहुत बुरा रिकॉर्ड है। यहां तक ​​कि यह अपनी जमीन से पोलियो को खत्म करने में भी नाकाम रहा है।

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